!! 8 !! बाल विकास Child development & Pedagogy in hindi for MP Samvida ( Varg 1, 2 ,3 ) , CTET , UPTET
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प्रश्न 1 – बालक
के विकास की दशा कैसी होती है।
उत्तर – सिर से पैर की ओर
इसे ( इसे केन्द्र से बाहर की ओर )
( सामान्य से विशिष्ट की ओर )
प्रश्न 2 – विश्लेषणात्मक
मनोविज्ञान के जनक कौन है।
उत्तर – सिंगमडफ्रायड
प्रश्न 3 – तूफान
की अवस्था किसे कहा जाता है।
उत्तर – किशोर अवस्था को
पश्न 4 – किशोर
अवस्था को तूफान अवस्था किसने कहां ।
उत्तर – स्टेनले हाल
प्रश्न 5 – नैतिक
विकास का सिद्धान्त किसने दिया।
उत्तर – कोहलवर्ग ने
प्रश्न 6 – मूल
प्रवृत्ति का सिद्धान्त किसने दिया।
उत्तर – मैक्डूनल ( 14 मूल
प्रवृतियां बताई )
प्रश्न 7 – संवेग
क्या है
उत्तर – मन की उत्तेजित दशा को
संवेग कहते है
जैसे – क्रोध , खुशी
प्रश्न 8 – व्यक्तित्व
का स्व: सिद्धान्त किसने दिया।
उत्तर – कार्लरोजर ने
प्रश्न 9 – सीखने
का सिद्धान्त किसने दिया।
उत्तर – थार्नडाइक ने
प्रश्न 10 – खेल
पद्धत्ति के जनक कौन है।
उत्तर – किल पैट्रिक
प्रश्न 11 – ह्यूरिस्टिक
पद्धत्ति के जनक कौन है।
उत्तर – आर्म स्ट्रांग
प्रश्न 12 – प्रोजक्ट
पद्धत्ति के जनक कौन है।
उत्तर – जानडेवी
प्रश्न 13 – अस्थाई
मानव दांत कितने होते है।
उत्तर – 20
प्रश्न 14 – शिशु
के मस्तिष्क का वजन कितना होता है।
उत्तर – लगभग 350 ग्राम
प्रश्न 15 – मनुष्य
के मस्तिष्क का वजन कितना होता है।
उत्तर – लगभग 1400 ग्राम
प्रश्न 16 – जीनप्याजे
ने जिनेवा मे किसकी स्थापना की ।
उत्तर – लेवोरट्री स्कूल की स्थापना
की जिसमें उन्होनें मनोविज्ञान के कई प्रयोग किये ।
प्रश्न 17 – जीनप्याजे
के द्वारा रचित पुस्तक का नाम क्या है।
उत्तर – द लैंगुवेज एण्ड थाट ऑफ
द चाइल्ड
यह पुस्तक उन्होनें
1923 में लिखी थी।
प्रश्न 18 – जीनप्याजे
ने संज्ञानात्मक विकास को ध्यान में रखते हुये बालक की कितनी अवस्था बतलाई ।
उत्तर – जीनप्याजे ने
संज्ञानात्मक विकास को ध्यान में रखते हुये बालक की 4 अवस्था बतलाई ।
1.संवेदी गत्यात्मक अवस्था
( जन्म से 2 वर्ष तक )
2. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
( 2 से 7 वर्ष तक )
3. ठोस/मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
( 7 से 11 वर्ष तक )
4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था
( 11 से 18 वर्ष तक )
प्रश्न 19 – संवेदी
गत्यात्मक अवस्था को और किस नाम से जाना जाता हैा
उत्तर – इंद्रीयजन ज्ञान की अवस्था
प्रश्न 20 – अधिगम
अन्तरण से क्या तात्पर्य है।
उत्तर – किसी पूर्व ज्ञान के
आधार पर नये ज्ञान को सीखना ही अधिगम अन्तरण कहलाता है।
उदा. – साईकल चलाने वाला व्यक्ति
स्कूटर चलाना जल्दी सीख जाता है।
प्रश्न 21 – अधिगम
अन्तरण कितने प्रकार के होते है।
उत्तर – अधिगम अन्तरण तीन
प्रकार के होते है।
1. धनात्मक अन्तरण
2. शून्य अन्तरण
3. ऋणात्मक अन्तरण
प्रश्न 22 – धनात्मक
अन्तरण कितने प्रकार का होता है।
उत्तर – धनात्मक अन्तरण 3
प्रकार का होता है।
1. क्षैतिज समान्तर
2. उर्ध्व ( लम्बवत् )
3. द्विपार्शिवक
प्रश्न 23 – गणित
सम्बन्धी विकार को क्या कहते है।
उत्तर – डिस्कैल्कुलिया।
प्रश्न 24 – पढने
सम्बन्धी विकार को क्या कहते है।
उत्तर – डिस्लैक्सिया
प्रश्न 25 – लिखने
सम्बन्धी विकार को क्या कहते है।
उत्तर – डिस्ग्राफिया
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